एक पाकिस्तानी सैनिक को क्यों मिला पद्मश्री सम्मान? (Why did a Pakistani soldier get the Padma Shri award?)
Aryan
| Photo Source: DNA India |
हर साल की तरह इस साल भी भारत के राष्ट्रपति द्वारा की महत्वपूर्ण हस्तियों को पद्म सम्मानों से सम्मानित किया गया। इसके बाद से ही भारत में कई लोग कंगना राणावत को यह सम्मान देने और सोनू सूद को ना देने को लेकर सवाल उठा रहे हैं। लेकिन इस बहस मे एक शख्स ऐसा भी था जिसकी चर्चा होनी आवश्यक है। दरअसल हम बात कर रहे हैं लेफ्टिनेंट कर्नल काजी सज्जाद अली जहीर की।
लेफ्टिनेंट कर्नल काजी सज्जाद अली जहीर एक पाकिस्तानी सैनिक रहे हैं। ऐसे मे एक पाकिस्तानी सैनिक को पद्म सम्मान देना चौंकाता है। तो चलिए जानते हैं आखिर लेफ्टिनेंट कर्नल काजी सज्जाद अली जहीर ने ऐसा क्या किया था कि भारत सरकार ने उन्हें पद्मश्री जैसे सम्मान से नवाजा।
पाकिस्तानी सेना में थे लेफ्टिनेंट कर्नल जहीर -
लेफ्टिनेंट कर्नल काजी सज्जाद अली जहीर पाकिस्तानी सेना में थे, लेकिन उन्होंने 1971 के भारत-पाकिस्तान युद्ध में भारत का साथ दिया था। यह बात मार्च 1971 की है जब सियालकोट मे तैनात जहीर सीमा पार कर के भारत में घुस आए। तब भारतीय सैनिकों ने उन्हें पाकिस्तानी जासूस समझ कर हिरासत में ले लिया था।इसके बाद उन्हें पठानकोट स्थित सेना के मुख्यालय ले जाया गया, जहां उनसे पूछताछ की गई। कहते हैं कि लेफ्टिनेंट कर्नल जहीर ने तब भारतीय अधिकारियों को पाकिस्तानी सेना की पोजीशन के बारे में कई जानकारियाँ दी और इससे संबंधित दस्तावेज सौंप दिए।
इसके बाद लेफ्टिनेंट कर्नल जहीर को दिल्ली में एक गुप्त स्थान पर रखा गया। बाद में उन्होंने मुक्ति वाहिनी को भी प्रशिक्षण दिया।
बांग्लादेश से संबंध रखते हैं जहीर -
लेफ्टिनेंट कर्नल जहीर का जन्म बांग्लादेश मे हुआ था। बाद मे वह पाकिस्तानी सेना मे भर्ती हो गए। हालांकि उन्होंने शुरू से ही देखा कि पाकिस्तान मे बांग्लादेशियों के साथ दोयम दर्जे का व्यवहार किया जाता था। उनके पास कोई अधिकार नहीं थे। जहीर कहते हैं कि जिन्ना ने हमसे लोकतंत्र का वादा किया था लेकिन हमें तानाशाही मिली। पाकिस्तान में हमारे साथ नौकर की तरह व्यवहार किया जाता था।मुक्ति वाहिनी तैयार करने में निभाई अहम भूमिका -
लेफ्टिनेंट कर्नल जहीर ने बांग्लादेश की आजादी के लिए मुक्ति वाहिनी को तैयार करने में भी अहम भूमिका का निर्वहन किया था। उन्होंने भारतीय सेना के साथ मिलकर हजारों बांग्लादेशी लड़ाकों को गुरिल्ला लड़ाई का प्रशिक्षण दिया। भारतीय सेना द्वारा प्रशिक्षित इन लड़ाकों के कारण पाकिस्तानी सेना को बांग्लादेश में करारी हार का सामना करना पड़ा। पाकिस्तान ने बाद में इस हार के लिए जहीर को जिम्मेदार ठहराया और उनके ऊपर युद्ध अदालत में मुकदमा चलाया।पाकिस्तान ने दी मौत की सजा -
पाकिस्तान आज तक लेफ्टिनेंट कर्नल जहीर को अपनी हार के लिए जिम्मेदार मानता है। युद्ध के बाद उन पर गद्दारी का मुकदमा चलाया गया और उन्हें मौत की सजा सुनाई गई। हालांकि जहीर तब से ही भारत में हैं और पाकिस्तान आज तक इस सजा को मुक्कमल करने का इंतजार कर रहा है।युद्ध के बाद लेफ्टिनेंट कर्नल जहीर ने हजारों लापता बांग्लादेशियों और गुमनाम नायकों को खोजने का भी काम किया। इसके लिए उन्हें पहले भी सम्मानित किया गया। आज जहीर बांग्लादेश में काफी सम्मानजनक स्थान रखते हैं।