पोर्नोग्राफी और इरोटिक कंटेन्ट में क्या अंतर है? (Difference between Pornography and Erotica)
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हाल ही में बिजनेसमैन और अभिनेत्री शिल्पा शेट्टी के पति राज कुन्द्रा पर पॉर्न फिल्मे बनाने के आरोप लगे थे। इसके बाद उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया। इस हाई प्रोफाइल केस में वकील सुभाष जाधव ने राज कुन्द्रा पर लगे आरोपों को निराधार बताया और दावा किया कि कुन्द्रा द्वारा बनाया गया कंटेन्ट इरोटिक की श्रेणी में आता है, ना कि पॉर्न की श्रेणी में। ऐसे में लोगों में यह जानने की उत्सुकता बढ़ी कि पॉर्न और इरोटिक में क्या अंतर है? आइए जानते हैं –

पोर्नोग्राफी क्या है?

पोर्नोग्राफी दरअसल ऐसे कंटेन्ट को कहा जाता है जिससे लोग सेक्सुअली उत्तेजित हों। इसके अंतर्गत विभिन्न तरह की नग्न फिल्में और साहित्य आते हैं। पॉर्न फिल्मों में पूर्णतः नग्न अवस्था में सेक्शुअल ऐक्ट किए जाते हैं। कुल मिलाकर शारीरिक संबंधों का ऑन कैमरा प्रदर्शन पॉर्न की श्रेणी में आता है।

इसके अलावा शारीरिक संबंध स्थापित करते हुए तस्वीरें और वीडियो भी पॉर्न की श्रेणी में आते हैं। इस तरह के कंटेन्ट में सेक्शुअल पार्ट्स का खुला प्रदर्शन किया जाता है।

इरोटिक क्या है?

इरोटिक, पॉर्न का ही एक सॉफ्ट प्रतिरूप है। दरअसल इसमें भी मुख्य उद्देश्य दर्शकों को सेक्सुअली उत्तेजित करना ही होता है, लेकिन इस तरह का कंटेन्ट कलात्मक तरीके से प्रदर्शित किया जाता है। इस तरह के कंटेन्ट में नग्नता होना जरूरी नहीं है। इसके तहत पेंटिंग, मूर्ति, फोटोग्राफी, फिल्म, संगीत और लिटरेचर जैसे कंटेन्ट आते हैं।

पोर्नोग्राफी और इरॉटिक कंटेंट में अंतर क्या है?

पोर्नोग्राफी और इरोटिक कंटेन्ट में क्या अंतर है, यह दुनियाभर के विशेषज्ञों के बीच बहस का विषय है। वहीं कानूनी तौर पर भी अभी तक इन दोनों को परिभाषित नहीं किया गया है। अमेरिकी फिल्म निर्माता लूसी फिशर का कहना है कि इरोटिक कंटेन्ट मिडिल क्लास के पढे लिखे लोगों के लिए हैं, वहीं पॉर्न अकेले और अशिक्षित लोगों के लिए। सामान्यतः बात करें तो सेक्शुअल पार्ट्स को दिखाकर लोगों को उत्तेजित करना पॉर्न की श्रेणी में आता है वहीं इन्हें दिखाए बिना लोगों को उत्तेजित करना इरोटिक कहलाता है। इरोटिक का उद्देश्य कलात्मक होता है जबकि पॉर्न को सिर्फ पैसे कमाने के लिए बनाया जाता है।