भारत के पास कितनी न्यूक्लियर पॉवर है? (Nuclear Power of India)
Aryan
| Photo Source: Wikimedia Commons |
हाल ही मे भारत में कोयले की कमी के कारण बिजली संकट की आशंकाएं जताई जा रही थी। अलग अलग राज्यों से लगातार कोयले की कमी की खबरें सामने आ रही थी और लोग बिजली उत्पादन ठप होने की बातें करने लगे थे। ऐसे में बिजली उत्पादन के लिए कोयले के विकल्पों पर भी चर्चाएं होने लगी।
अगर बिजली उत्पादन के लिए कोयले के विकल्पों पर बात करें तो हाइड्रो पॉवर और न्यूक्लियर पॉवर मुख्य हैं। ये दोनों ही ऊर्जा के साफ सुथरे स्त्रोत माने जाते हैं। इनके अलावा सौर ऊर्जा और पवन ऊर्जा भी विकल्पों में गिने जा सकते हैं, लेकिन इन दोनों से भारत जैसे देश की बिजली जरूरतों को पूरा कर पाना संभव नहीं है।
कोयला संकट के बीच लोगों के मन में यह सवाल आने लगा कि आखिर भारत के पास कितनी न्यूक्लियर पॉवर है? आज के इस आर्टिकल में हम इसी सवाल का जवाब जानने का प्रयास करेंगे।
बिजली पैदा करने के संदर्भ में भारत दुनिया का पाँचवाँ सबसे बड़ा देश है। भारत सरकार लगातार देश की न्यूक्लियर क्षमताओं को बढ़ाने के प्रयास कर रही है। आजादी के बाद से ही देश ने परमाणु ऊर्जा के क्षेत्र मे आत्मनिर्भरता की तरफ कदम बढ़ाने शुरू कर दिए थे।
इसी क्रम में मशहूर परमाणु वैज्ञानिक होमी जहांगीर भाभा ने तत्कालीन प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू को परमाणु ऊर्जा में निवेश करने के लिए राजी किया। इसके बाद उन्हीं के नेतृत्व मे भारतीय परमाणु ऊर्जा आयोग बनाया गया। तब से ही भारत परमाणु ऊर्जा के क्षेत्र मे लगातार प्रगति कर रहा है।
यह होमी जहांगीर भाभा की दूरगामी सोच का ही नतीजा है कि आज देश मे 23 परमाणु रिएक्टर बिजली निर्माण में लगे हुए हैं। इसके अलावा साथ परमाणु रिएक्टरों का निर्माण भी जल्दी ही पूरा होने वाला है।
1999 में किए गए परमाणु परीक्षणों के बाद से ही भारत पर न्यूक्लियर तकनीक को लेकर कुछ प्रतिबंध लागू हैं। इसी कारण से भारत को परमाणु संयंत्रों के व्यापारिक समझौतों से बाहर रखा गया है। हालांकि 2008 में अमेरिका के साथ हुए परमाणु समझौते के बाद भारत को न्यूक्लियर सप्लायर्स ग्रुप द्वारा कुछ छूट दी गई हैं, जिससे भारत की पहुँच असैन्य परमाणु तकनीक और अन्य देशों से परमाणु ईंधन के व्यापार तक हुई है।
इसके अलावा भारत देश मे ही उपस्थित थॉरियम भंडार का उपयोग करने के लिए भी तकनीक विकसित कर रहा है और इस दिशा मे अनुसंधान जारी है।
अगर बिजली उत्पादन के लिए कोयले के विकल्पों पर बात करें तो हाइड्रो पॉवर और न्यूक्लियर पॉवर मुख्य हैं। ये दोनों ही ऊर्जा के साफ सुथरे स्त्रोत माने जाते हैं। इनके अलावा सौर ऊर्जा और पवन ऊर्जा भी विकल्पों में गिने जा सकते हैं, लेकिन इन दोनों से भारत जैसे देश की बिजली जरूरतों को पूरा कर पाना संभव नहीं है।
कोयला संकट के बीच लोगों के मन में यह सवाल आने लगा कि आखिर भारत के पास कितनी न्यूक्लियर पॉवर है? आज के इस आर्टिकल में हम इसी सवाल का जवाब जानने का प्रयास करेंगे।
बिजली पैदा करने के संदर्भ में भारत दुनिया का पाँचवाँ सबसे बड़ा देश है। भारत सरकार लगातार देश की न्यूक्लियर क्षमताओं को बढ़ाने के प्रयास कर रही है। आजादी के बाद से ही देश ने परमाणु ऊर्जा के क्षेत्र मे आत्मनिर्भरता की तरफ कदम बढ़ाने शुरू कर दिए थे।
इसी क्रम में मशहूर परमाणु वैज्ञानिक होमी जहांगीर भाभा ने तत्कालीन प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू को परमाणु ऊर्जा में निवेश करने के लिए राजी किया। इसके बाद उन्हीं के नेतृत्व मे भारतीय परमाणु ऊर्जा आयोग बनाया गया। तब से ही भारत परमाणु ऊर्जा के क्षेत्र मे लगातार प्रगति कर रहा है।
यह होमी जहांगीर भाभा की दूरगामी सोच का ही नतीजा है कि आज देश मे 23 परमाणु रिएक्टर बिजली निर्माण में लगे हुए हैं। इसके अलावा साथ परमाणु रिएक्टरों का निर्माण भी जल्दी ही पूरा होने वाला है।
1999 में किए गए परमाणु परीक्षणों के बाद से ही भारत पर न्यूक्लियर तकनीक को लेकर कुछ प्रतिबंध लागू हैं। इसी कारण से भारत को परमाणु संयंत्रों के व्यापारिक समझौतों से बाहर रखा गया है। हालांकि 2008 में अमेरिका के साथ हुए परमाणु समझौते के बाद भारत को न्यूक्लियर सप्लायर्स ग्रुप द्वारा कुछ छूट दी गई हैं, जिससे भारत की पहुँच असैन्य परमाणु तकनीक और अन्य देशों से परमाणु ईंधन के व्यापार तक हुई है।
इसके अलावा भारत देश मे ही उपस्थित थॉरियम भंडार का उपयोग करने के लिए भी तकनीक विकसित कर रहा है और इस दिशा मे अनुसंधान जारी है।
भारत के मौजूद परमाणु अनुसंधान केंद्र -
- एटॉमिक एनर्जी कमीशन ऑफ इंडिया, मुंबई
- एटॉमिक मिनरल्स डायरेक्टोरेट फॉर एक्स्प्लोरेशन एंड रीसर्च, हैदराबाद
- भाभा एटॉमिक रीसर्च सेंटर, मुंबई
- सेंट्रल इंस्टीट्यूट ऑफ माइनिंग एंड फ्यूल रीसर्च, धनबाद
- इंदिरा गांधी सेंटर फॉर एटॉमिक रीसर्च, कलपक्कम
- इंडियन रेयर अर्थस, मुंबई
- नेशनल केमिकल लैबोरेट्री, पुणे
- न्यूक्लियर फ्यूल कॉम्प्लेक्स, हैदराबाद
- फिजिकल रीसर्च लैबोरेट्री, अहमदाबाद
- साहा इंस्टीट्यूट ऑफ न्यूक्लियर फीजिक्स, कोलकाता
- यूरेनियम कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया, सिंहभूम
- वैरिएबल एनर्जी साइक्लोट्रान सेंटर, कोलकाता
- टाटा इंस्टीट्यूट ऑफ फंडामेंटल रीसर्च, मुंबई